*दि. १२/६/२०२२*
*विषय - संसार*
*काव्यप्रकार - अभंग*
(६-६-६-४)
घाट संसाराचा
संसाराचे सुख | चमक बेगडी ||
विकारांची बेडी| सुटेनाच ||१||
येथे विषयांनी | उच्छाद मांडले ||
पाठीशी लागले | निशदिन ||२||
संसार नि सुख | जणू की विलोम ||
सुखाची ती गोम | विठू पायी ||३||
संसाराचा घाट | भातुकली खेळ||
कर्मांचा तो मेळ || बसवाया ||४||
पुरे येरझार | आळवे हरीणी ||
श्रीहरी चरणी | देई दास्य ||५||
साधनेत साध | मोक्ष हेचि लक्ष्य ||
षडांचे तू भक्ष्य | होऊ नको ||६||
सरोजासमान | राहूनी अलिप्त ||
जागव त्या सुप्त | चेतनेस ||७||
कर्मगतीस्तव | लाभलिसे 'कारा' ||
गुंफू श्वास सारा | हरीनामी ||८||
दुःखांचे हे मूळ | खुळं सारं सुख ||
होता अंतर्मुख | आत्मानंद ||९||
संसार 'तो' हवा | अंतर्बाह्य हरी ||
सुधाही विखारी | जयापुढे ||१०||
रचना
©शिल्पा म वाघमारे
स. शि
जि प प्रा शाळा मालेगाव खु ता गेवराई जि बीड
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