कृष्णार्पित काव्यशिल्प

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रविवार, १० नोव्हेंबर, २०२४

🚩 अभंग चोविसाआगळा पांडुरंग


अभंग 


निर्गुणाची वारी


अगा पांडुरंगा| चोविसावेगळा ||

सहस्त्रांआगळा | तूच एक ||१||


रम्य मनोहारी | भक्त गोतावळा ||

पायी त्या मोकळा | श्वास माझा  ||२||


विवेक जागृती | हेच पारिपत्य ||

भेटीचे अगत्य | पांडुरंगा||३||


अलभ्यच लाभ | सुखाचेही सुख ||

देखताचि मुख | माधवाचे ||४ ||


येता अनुभूती | तूच जीवनार्थ ||

सत्व मतितार्थ | भक्तीचाही ||५||


देही नवद्वारा | विकारा अव्हेरु||

विठू महामेरू | वारी तुझी ||६||


नमो नमो आद्या | निराकार रुपा ||

चैतन्य स्वरुपा | विश्वाधारा ||७||


विठ्ठल विठ्ठल |पंचप्राण गाती||

निर्गुणाची प्राप्ती| हाचि ध्यास ||८||


नको मोक्ष मुक्ती | न लगे वैकुंठ||

दाटलासे कंठ| भेटीसाठी ||९||


घडो मजलाही | निर्गुणाची वारी ||

सरो भ्रांत सारी| एकदाची ||१०||

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देवा पांडुरंगा| चोविसावेगळा ||

सहस्त्रांआगळा | तूच एक ||१||


विवेक जागृती | हेच पारिपत्य ||

भेटीचे अगत्य | पांडुरंगा ||२||


अलभ्यच लाभ | सुखाचेही सुख ||

देखताचि मुख | माधवाचे   ||३||


विठ्ठला विठ्ठला | तूच जीवनार्थ ||

सत्व मतितार्थ | भक्तीचाही ||४||


देही नवद्वारा | विकारा अव्हेरु|

विठू महामेरू | वारी तुझी ||५||


मोक्ष मुक्ती, सिद्धी| न लगे वैकुंठ||

दाटलासे कंठ | तुझ्यासाठी ||६||


घडो मजलाही | निर्गुणाची वारी ||

सरो भ्रांत सारी | एकदाची ||७||


नमो नमो आद्या | निराकार रुपा ||

चैतन्य स्वरुपा | विश्वाधारा  ||८||



नमो नमो आद्या | निराकार रुपा ||

चैतन्य स्वरुपा | विश्वाधारा ||८||






रचना

श्रीम्. शिल्पा म.वाघमारे

सहशिक्षिका बीड

दि. ११.०७.२०२२


अभंग


देवा पांडुरंगा| चोविसावेगळा ||

सहस्त्रांआगळा | तूच एक ||१||


रम्य मनोहारी | भक्त गोतावळा ||

पायी त्या मोकळा | श्वास माझा  ||२||


विवेक जागृती | हेच पारिपत्य ||

भेटीचे अगत्य | पांडुरंगा||३||


प्रीत सवंगडी | आदर्श नीतीचा ||

संसारी मोक्षाचा | वारकरी ||४||


अलभ्यच लाभ | सुखाचेही सुख ||

देखताचि मुख | माधवाचे ||५||


येता अनुभूती | तूच जीवनार्थ ||

सत्व मतितार्थ | भक्तीचाही ||६||


देही नवद्वारा | विकारा अव्हेरु||

विठू महामेरू | वारी तुझी ||७||


नमो नमो आद्या | निराकार रुपा ||

चैतन्य स्वरुपा | विश्वाधारा ||८||


विठ्ठल विठ्ठल |पंचप्राण गाती||

निर्गुणाची प्राप्ती| हाचि ध्यास ||९||


नको मोक्ष मुक्ती | न लगे वैकुंठ||

दाटलासे कंठ| भेटीसाठी ||१०||



रचना

© शिल्पा म.वाघमारे

सहशिक्षिका, जि प प्रा मराठी कन्या शाळा बार्शीटाकळी जि अकोला 

दि. 12.07.2019



असीम आभाळी |अथांग सागरी||

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