(सुधाकरी अभंग)
शिवतत्व
शिव एक तत्व | शांत निराकार ||
मनाचे विकार | शमवी जो...||१||
उत्पत्ती लयाचा | तोच अधिकारी ||
विश्वाला जो तारी | संकटात...||२||
निर्गुण तेजस्वी |चैतन्याची आभा ||
दिव्यतेज प्रभा | शिवतत्व...||३||
समागम तेथे | हरी आणि हर ||
जीवाचा उद्धार | करितसे ...||४||
चीरशांती क्षमा | सुखाच्याच राशी ||
त्यांच्या चरणाशी | होई प्राप्ती...||५||
मृषा हा संसार | वाट कंटकाची ||
मन सुमनचि | वाहियले ... ||६||
श्वासश्वास गातो | अंतरात खोल ||
भक्तीचीच ओल | जपताहे...||७||
न लगेच मोक्ष |लागो वेड, ध्यास ||
शिवनामी ऱ्हास | विषयांचा... ||८||
वरकरणी |भुलला लौकिका ||
आनंदास तू का?| पारखाच....||९||
एक चीरतत्त्व | ठायी ठायी शिव ||
चित्त स्थिर ठेव | जाण मर्म...||१०||
तेजबिंदूरुपे | ध्यान आठवावे||
मना पाठवावे | मुक्ताकाशी...||११||
तेज साठलेले | तव अंतरात ||
चेतवून ज्योत | सार तम...||१२||
