: मेरी कविता
गुणगुणाता मधुर स्वर है
नवरसों की जैसे फुहार है
मन भावना की पुकार है
मेरी कविता मानवाधार है... 1
समर्पित प्रभू की चरणों में
चमकती किंमती स्वर्णों में
माला पिरोई मोती वर्णों में
मेरी कविता हरीयाली पर्णों में... 2
तितली कोमल है जैसे बलखाती
सोनपरी सुंदरा जैसे इठलाती
अमृत गगरीया है छलकाती
मेरी कविता नभ को है समाती .. 3
प्रेम की प्यारी बरसात है
पुनम की दमकती रात है
लहराती मदमस्त वात है
मेरी कविता की क्या बात है... 4
समाज वेदना का है आईना
रंगबिरंगी है अमोल खजाना
समता, एकता का है ठिकाणा
मेरी कविता सफलता का सपना... 5
रचना © शिल्पा म.वाघमारे
सहशिक्षिका बीड
दि 1. 2.2019.
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