कृष्णार्पित काव्यशिल्प

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बुधवार, ६ नोव्हेंबर, २०१९

हिन्दी... मेरी कविता

: मेरी कविता  

गुणगुणाता मधुर स्वर है
नवरसों की जैसे फुहार है
मन भावना की पुकार है 
मेरी कविता मानवाधार है... 1

समर्पित प्रभू की चरणों में
चमकती किंमती स्वर्णों में
माला पिरोई मोती वर्णों में
मेरी कविता हरीयाली पर्णों में... 2 

तितली कोमल है जैसे बलखाती
सोनपरी सुंदरा जैसे इठलाती
अमृत गगरीया है छलकाती
मेरी कविता नभ को है समाती .. 3 

प्रेम की प्यारी बरसात है
पुनम की दमकती रात है
लहराती मदमस्त वात है
मेरी कविता की क्या बात है... 4

 समाज वेदना का है आईना
रंगबिरंगी है अमोल खजाना
समता, एकता का है ठिकाणा
मेरी कविता सफलता का सपना... 5 

रचना © शिल्पा म.वाघमारे 
सहशिक्षिका बीड
 दि 1. 2.2019.

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